सिंह लग्न में जन्मा जातक भोगी, शूरवीर, प्रभावशाली, उत्साही तथा रण में पराक्रमी माना जाता है। ऐसे जातक आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं। इनका शरीर मजबूत, छाती चौड़ी तथा व्यक्तित्व आकर्षक होता है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं और अपने साहस के बल पर कार्य पूर्ण करने का प्रयास करते हैं।
ये जातक जीवन की प्रत्येक परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं। आत्मविश्वास अधिक होने के कारण कभी-कभी दूसरों पर अपना प्रभाव जमाने का प्रयास करते हैं। अपने कार्यों, व्यवहार तथा गुणों के कारण समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। मजबूत हृदय वाले, धर्मप्रिय, दानी तथा भरोसेमंद माने जाते हैं। दूसरों की गलतियों को सहजता से नहीं भूलते तथा छोटी बातों को भी गंभीरता से लेते हैं।
कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने की इच्छा रखते हैं और अपने लक्ष्य को पूरी लगन से प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। हर प्रकार के कार्यों में तत्पर रहते हैं, किंतु नौकरी, प्रशासनिक कार्य तथा व्यापार में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं। पहनने-ओढ़ने तथा खान-पान की अच्छी वस्तुओं का शौक रखते हैं। संतान सुख को लेकर कभी-कभी चिंता बनी रहती है। यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो, तो जातक को उत्तम संतान सुख प्राप्त होता है।
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य माना गया है। यदि जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति शुभ हो, तो जातक आयुष्मान, यशस्वी, तेजस्वी तथा प्रभावशाली होता है। वहीं सूर्य की अशुभ स्थिति होने पर अत्यधिक क्रोध, दूसरों पर प्रभाव जमाने की प्रवृत्ति तथा मानसिक अशांति देखने को मिल सकती है।
सिंह लग्न में जन्मा जातक भोगी, शूरवीर, प्रभावशाली, उत्साही तथा रण में पराक्रमी माना जाता है। ऐसे जातक आत्मविश्वासी, स्वाभिमानी और नेतृत्व क्षमता वाले होते हैं। इनका शरीर मजबूत, छाती चौड़ी तथा व्यक्तित्व आकर्षक होता है। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं और अपने साहस के बल पर कार्य पूर्ण करने का प्रयास करते हैं।
ये जातक जीवन की प्रत्येक परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने की क्षमता रखते हैं। आत्मविश्वास अधिक होने के कारण कभी-कभी दूसरों पर अपना प्रभाव जमाने का प्रयास करते हैं। अपने कार्यों, व्यवहार तथा गुणों के कारण समाज में सम्मान प्राप्त करते हैं। मजबूत हृदय वाले, धर्मप्रिय, दानी तथा भरोसेमंद माने जाते हैं। दूसरों की गलतियों को सहजता से नहीं भूलते तथा छोटी बातों को भी गंभीरता से लेते हैं।
कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने की इच्छा रखते हैं और अपने लक्ष्य को पूरी लगन से प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। हर प्रकार के कार्यों में तत्पर रहते हैं, किंतु नौकरी, प्रशासनिक कार्य तथा व्यापार में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं। पहनने-ओढ़ने तथा खान-पान की अच्छी वस्तुओं का शौक रखते हैं। संतान सुख को लेकर कभी-कभी चिंता बनी रहती है। यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो, तो जातक को उत्तम संतान सुख प्राप्त होता है।
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य माना गया है। यदि जन्म कुंडली में सूर्य की स्थिति शुभ हो, तो जातक आयुष्मान, यशस्वी, तेजस्वी तथा प्रभावशाली होता है। वहीं सूर्य की अशुभ स्थिति होने पर अत्यधिक क्रोध, दूसरों पर प्रभाव जमाने की प्रवृत्ति तथा मानसिक अशांति देखने को मिल सकती है।