मेष लग्न

मेष लग्न पूर्व दिशा की स्वामी, ताम्र-वर्ण वाला, पुरुष जाति, चर स्वभाव, अग्नितत्व, क्षत्रिय वर्ण तथा कालपुरुष के मस्तक का प्रतिनिधित्व करता है। मेष लग्न का स्वामी मंगल होता है। इस लग्न में जन्मे जातक मध्यम कद, लाल एवं पीले रंग के, बलवान, चंचल तथा स्पष्ट विचारों वाले होते हैं। ऐसे जातक दूसरों के कार्यों में हस्तक्षेप करने वाले, चेहरे पर लंबा या मोटा चिन्ह रखने वाले, नुकीले दांत, साहसी, समृद्ध तथा धनवान होते हैं। कठिन परिस्थितियों का सामना मुस्कुराकर करते हैं। सामाजिक रूढ़ियों का विरोध करने पर भी उनका पालन करते हैं। राज सम्मान प्राप्त करना, धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखना तथा प्रभावशाली व्यक्तित्व इनकी विशेषता होती है। ये अपनी प्रतिभा से उच्च स्थान प्राप्त कर लेते हैं। विज्ञान तथा शोध कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं। छोटी-छोटी बातों पर शीघ्र क्रोधित हो जाते हैं, किंतु तुरंत शांत भी हो जाते हैं। शारीरिक कार्य, कला-संगीत तथा साहित्य में भी रुचि रखते हैं। जीवन में उतार-चढ़ाव बने रहते हैं। यदि जन्म कुंडली में मंगल शुभ भाव में स्थित हो, तो अत्यधिक धन प्राप्ति के योग बनते हैं, और अशुभ भाव में होने पर जातक अत्यंत क्रोधी, चोर, जुआरी, चालाक, क्रूरकर्मी, अधर्मी तथा उग्र स्वभाव का हो सकता है।

मंगल से प्रभावित होने के कारण इनके आयुष्मान होने तथा हीन भावना से दूर रहने की संभावना रहती है। अतः जन्मकुंडली के विभिन्न ग्रहों की लग्न पर दृष्टि का विचार विशेष रूप से करना चाहिए। जिस-जिस ग्रह की दृष्टि लग्न पर पड़ती है, उसका प्रभाव भी जातक के मन और स्वभाव पर दिखाई देता है। इसलिए संपूर्ण निष्कर्ष निकालने से पूर्व विस्तृत अध्ययन आवश्यक माना गया है।

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