वृश्चिक लग्न

वृश्चिक लग्न में जन्मा जातक शूरवीर, धनवान, परिश्रमी, बुद्धिमान तथा सबका पालन करने वाला होता है। ऐसे जातकों का शरीर मजबूत, मस्तक चौड़ा तथा व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। इनकी आंखों में तेज और स्वभाव में गंभीरता दिखाई देती है। ये लोग अपने व्यक्तित्व से दूसरों को प्रभावित कर लेते हैं तथा प्रेम और संबंधों के प्रति गहरी भावनाएँ रखते हैं।

इनमें साहस और आत्मबल की कमी नहीं होती। कार्यों को पूरी निष्ठा और लगन से करने वाले होते हैं। राजनीति, प्रशासन तथा नेतृत्व से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। दूसरों की बातों को गहराई से समझने वाले, तेज बुद्धि तथा निर्णय लेने में सक्षम होते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं और अपने लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं।

इनका स्वभाव कभी-कभी क्रोधी और जिद्दी भी हो सकता है। बड़े कार्यों को करने में विशेष रुचि रखते हैं तथा जोखिम उठाने से नहीं घबराते। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करने पर रोग होने की संभावना रहती है। मानसिक रूप से अत्यंत मजबूत होते हुए भी मन में कई बातें छिपाकर रखते हैं। हर कार्य को गंभीरता और पूर्णता के साथ करने का प्रयास करते हैं।

वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल ग्रह माना गया है। यदि जन्म कुंडली में मंगल शुभ स्थिति में हो, तो जातक आयुष्मान, पराक्रमी, सम्मानित तथा सभी प्रकार के सुख प्राप्त करने वाला होता है। वहीं मंगल की अशुभ स्थिति होने पर क्रोध, विवाद, चोट, रक्त संबंधी रोग तथा शत्रुओं से परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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