मिथुन लग्न में जन्मा जातक अभिमानी, भाई-बन्धुओं का प्रिय, त्यागी, भोगी, धनवान, कामी, धैर्यशील तथा कार्य करने में निपुण होता है। ऐसे जातक बुद्धिमान, जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले तथा कभी-कभी अपने विचारों के कारण असफलता का अनुभव करने वाले होते हैं। इनके मन में अनेक प्रकार की भावनाएँ चलती रहती हैं, जिससे कई बार निर्णय लेने में कठिनाई आती है। फिर भी यह साहसपूर्वक जोखिम उठाने के लिए सदैव तैयार रहते हैं। बातचीत में अत्यंत चतुर, कार्यों में तीव्र तथा सच्चे मित्र माने जाते हैं।
इनकी बुद्धि अनेक विषयों की ओर आकर्षित रहती है। विद्या, लेखन, वकालत, विद्याभ्यास अथवा व्यापार इनके प्रमुख गुणों में सम्मिलित होते हैं। स्वभाव कोमल होता है तथा जिस कार्य को करने का निश्चय कर लें, उसे पूरी लगन से पूर्ण करते हैं। प्रत्येक विषय में नवीन जानकारी प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। कानून, व्यापार तथा लोक संबंधी कार्यों में विशेष रुचि होती है। हृदय से मजबूत होते हुए भी रसिक स्वभाव के कारण कभी-कभी मानसिक दुर्बलता अनुभव करते हैं। विद्या के कारण सम्मान प्राप्त करते हैं और यात्राएँ अधिक करना पसंद करते हैं। दुःख एवं सुख दोनों स्थितियों में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करते हैं। इनके हृदय में सदा चिंतन चलता रहता है। भाई-बहनों का स्नेह प्राप्त होता है तथा प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
इनकी आदतें विविध प्रकार की होती हैं और सनातन परंपराओं के प्रति विशेष लगाव रहता है। मित्रों के प्रिय होते हैं, किंतु सभी से घनिष्ठ संबंध नहीं बना पाते। मिथुन लग्न का स्वामी बुध ग्रह माना गया है। यदि जन्म कुंडली में बुध शुभ स्थिति में हो तथा शुभ ग्रहों की दृष्टि प्राप्त हो, तो जातक आयुष्मान, विद्वान, सुखी तथा व्यवसाय में सफल होता है। वहीं बुध की अशुभ स्थिति होने पर चिंता, मानसिक अस्थिरता तथा कार्यों में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है।