कर्क लग्न

कर्क लग्न में जन्मा जातक धार्मिक प्रवृत्ति वाला, लोगों का प्रिय, मधुर भोजन पसंद करने वाला, भाग्यवान तथा सज्जनों का सम्मान करने वाला होता है। ऐसे जातक भावुक तथा संवेदनशील स्वभाव के होते हैं। इनके मन में अपने परिवार और संबंधों के प्रति विशेष लगाव रहता है, किंतु जीवन में कई बार अपेक्षित उन्नति प्राप्त नहीं हो पाती। असफलताओं के कारण इनके मन में हीन भावना या देवताओं के प्रति विरोध की भावना भी उत्पन्न हो सकती है। फिर भी ये दूसरों की सहायता करने में सदैव तत्पर रहते हैं और जिस कार्य को करने का निश्चय कर लें, उसे पूरी लगन से पूरा करने का प्रयास करते हैं।

इनका जीवन अवसरों और उतार-चढ़ाव से भरा रहता है। स्वभाव से शांत, विचारशील तथा मेल-जोल रखने वाले होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति से मधुर व्यवहार करते हैं तथा दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता रखते हैं। कभी-कभी दूसरों के विचारों को अपने मन में स्थान देने के कारण मानसिक तनाव अनुभव करते हैं। धन की कमी होने पर भी अपने कार्यों को किसी न किसी प्रकार पूरा कर लेते हैं। नवीन कार्यों में रुचि रखते हैं तथा परिवार के प्रति विशेष जिम्मेदारी निभाते हैं।

पति-पत्नी के विचारों में मतभेद रहने की संभावना रहती है। व्यापार, ऐश्वर्य तथा सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं, किंतु सफलता और विलंब साथ-साथ चलते हैं। जीवन का प्रारंभिक समय संघर्षपूर्ण रह सकता है। लगभग 34 वर्ष की आयु के बाद परिस्थितियों में सुधार देखने को मिलता है। स्वभाव से कोमल और भावुक होने के कारण छोटी-छोटी बातों का प्रभाव मन पर अधिक पड़ता है।

कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा माना गया है, जो प्रतिदिन अपनी स्थिति बदलता रहता है। यदि जन्म कुंडली में चन्द्रमा शुभ स्थिति में हो, तो जातक सुखी, सम्मानित, आयुष्मान तथा गुणवान होता है। वहीं चन्द्रमा की अशुभ स्थिति होने पर मानसिक कमजोरी, शरीर में दुर्बलता, रक्त विकार तथा सांस संबंधी समस्याओं की संभावना बनी रहती है।

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